कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल महामहिम मनोज सिन्हा जी, सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक संत स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, पूर्व सांसद गिरिजा पाण्डेय जी, डॉ. शंकर दयाल सिंह के सुपुत्र राजेश सिंह जी, डॉ. शंकर दयाल सिंह की सुपुत्री एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी डॉ. रश्मि सिंह जी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने शिरकत की।
नई दिल्ली स्थित एन.डी.एम.सी. कन्वेंशन सेंटर में ‘हमारी जरूरतें और चाहतें’ विषय पर डॉ. शंकर दयाल सिंह व्याख्यान माला के अंतर्गत एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। NDMC Convention Centre का सभागार पूरी तरह भरा रहा और देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने इसमें भाग लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना से हुआ। स्वागत भाषण में डॉ. शंकर दयाल सिंह के सुपुत्र राजेश सिंह ने मुख्य अतिथि Manoj Sinha, मुख्य वक्ता Swami Chidanand Saraswati तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया।
मुख्य वक्ता स्वामी चिदानंद सरस्वती ने भारतीय संस्कृति के संदर्भ में ‘जरूरत’ और ‘चाहत’ के अंतर को सरल उदाहरणों और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाया। उन्होंने कहा कि संतुलित जीवन के लिए शांति, संयम और संतोष आवश्यक हैं। आधुनिक समाज में इन मूल्यों को अपनाने की जरूरत पर उन्होंने विशेष बल दिया।मुख्य अतिथि मनोज सिन्हा ने डॉ. शंकर दयाल सिंह को एक प्रखर साहित्यकार, ईमानदार राजनेता और राष्ट्रवादी विचारक बताते हुए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इच्छाओं का कोई अंत नहीं होता, लेकिन संतुलन और जागरूकता ही जीवन की वास्तविक दिशा तय करते हैं। साथ ही उन्होंने भारत की विकास यात्रा और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में Girija Devi, पूर्व केंद्रीय मंत्री Sanjay Singh, Akhilesh Pratap Singh, Dinesh Singh, Santosh Bhartiya, Sanjay Paswan सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रश्मि सिंह ने किया।यह व्याख्यान माला डॉ. शंकर दयाल सिंह के विचारों को स्मरण करते हुए समाज को संतुलित और सार्थक जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला महत्वपूर्ण आयोजन साबित हुआ।
