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एकता सहगल मल्होत्रा- लेखिका इतनी नफ़रत कैसे कर लेते हो ?किस माटी के हो बने तुम ?किस मां ने तुम…
यकीन की चिड़िया, दर ब दर उड़ रही है,किस दरख़्त पर बसेरा बनाए, परेशान सी सोच रही है।ना जाने कब…
नई दिल्ली: लेखकों डॉ. हर्षाली सिंह और मोना वर्मा की साहित्यिक कोशिश हाउस ऑफ हार्मनी रविवार 16 अप्रैल को राष्ट्रीय…
अपनी हस्ती को बचाए रखने को उम्मीद का दामन ज़रूरी है ,दिलो दिमाग की डयोढी पर उम्मीद का आसन ज़रूरी…
आम तौर पर लोग भीगे हुए चने का पानी फेंक देते हैं। सभी को यह तो पता है कि भीगे…
है माँ दुर्गेहूँ अवतार मैं तेराफिर क्यों क्षण क्षणहुआ तिरस्कार मेरा तुझे छिपने को मिली जगहअर्द्ध कुवारी मेंआई तू भैरो…
पहली सांस जब ली थी तुम्हारे उदर में,मेरा नन्हा हृदय धड़का था तुम्हारे उदर में ,मैंने महसूस किया था मां,…
सिर्फ एक बक्से में ज़िंदगी बसर करते हैं,हां। मेरे फौजी भाई यूं ही सफ़र करते हैं। हरे टीन के बक्से…