पितृपक्ष में क्यों नहीं करनी चाहिए, भगवान की अराधना

पितृपक्ष आज से आरंभ हो चुके हैं। भाद्रपद माह के पूर्णिमा तिथि से लेकर अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक पितृपक्ष चलता है। पितृपक्ष की शुरुआत अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि से हो चुकी है और इसकी समाप्ति अश्विन माह की अमावस्या यानी 25 सितंबर को होगी। इस अंतराल में पितृो को खुश करने के लिए पूजा पाठ, पितृो के नाम पर दान दक्षिणा की जाती है।

पितृपक्ष का हिंदू धर्म में विशेष महत्व

पितृपक्ष यानी श्राद्ध का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। बता दें कि पितृपक्ष में पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करके उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है। श्राद्ध न केवल पितृरों की मुक्ति के लिए किया जाता है, बल्कि उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिए भी किया जाता है। हिन्दू धार्मिक मान्यता और पौराणिक शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में सभी प्रकार के मांगलिक व शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इस समय भगवान कि अर्धना भी करना मना है। शास्त्रों में देवी-देवताओं की पूजा के साथ पूर्वजों की पूजा भी वर्जित मानी जाती है। ऐसे में सबके मन में एक सवाल उठता है कि पितृपक्ष में देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए या नहीं ? पितृो का ये महीने में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता। इस समय बस पितृो को याद कर उनकी सेवा की जाती है।

क्यों नहीं करनी चाहिए पितृपक्ष में भगवान की पूजा

पितृरों को हिन्दू धर्म में पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष के दौरान पितर पृथ्वी पर वास करते हैं और अपने परिवार द्वारा किए दान पूण को स्वीकारते है ऐसे में इस दौरान पितृरों की पूजा करना बेहद कल्याणकारी माना गया है। इस वक़्त पितृ की पूजा करना उनका सेवा करना परिवार के लिए शुभ होता है लेकिन क्या पितृपक्ष के दौरान देवी-देवता की पूजा करनी चाहिए या नहीं? शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में प्रतिदिन की तरह ही पूजा करनी चाहिए। हालांकि इस दौरान पितृ हमारे पूजनीय अवश्य हैं लेकिन ईश्वर से उच्च नहीं है इसीलिए इस दौरान हमें देवी-देवता की पूजा करनी चाहिए पर कुछ लोगो कि मान्यताए अलग है रीत अलग है इसलिए वो कुछ लोग पितृपक्ष के महीने में भगवान का पूजा पाठ नहीं करते है। ऐसा मना जाता है कि भगवान कि पूजा करने से पितृो का अनादर होता है।

पितृपक्ष के समय इन बातो का खास रखे ध्यान

1 वास्तु शास्त्र के अनुसार पितृरों की तस्वीर का मुख हमेशा घर में दक्षिण दिशा की तरफ रखें।
2 वास्तु शास्त्र की मानें तो घर में पितृरों की एक से अधिक तस्वीर नहीं होनी चाहिए।
3 घर के मंदिर में कभी भी देवी-देवताओं की तस्वीर के साथ पूर्वजों या दिवगंत परिजनों की तस्वीर न लगाएं। यदि आप ऐसा करते हैं तो आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
4 इस बात का ध्यान रखें कि देवी देवताओं की पूजा के बिना पितृपक्ष में श्राद्ध, पिंडदान इत्यादि का फल नहीं मिलता है।
5 पितृ दोष से छुटकारा पाने के लिए पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *