यह प्रदर्शनी नेविल तुली द्वारा तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज (टी.आर.आई.एस.) के लिए आयोजित की गई है, जो कि चल रहे 6वें आत्म-खोज (सेल्फ-डिस्कवरी) के माध्यम से भारत की पुनः खोज महोत्सव का हिस्सा है। नेविल तुली की कला एवं सांस्कृतिक इंफ्रास्ट्रक्चर (ढांचे) तथा उसके शोध पारितंत्र के निर्माण की तीन दशकों से अधिक की विशिष्ट यात्रा पर आधारित इस अग्रणी शोध संस्थान ने ‘इंडियाज़ विज़ुअल पॉलिटिकल आइकोनिसिटी (भाग-2) – नेताजी सुभाष चंद्र बोस’ प्रदर्शनी के उद्घाटन की घोषणा की। यह प्रदर्शनी 26 जनवरी 2026 को द ओपन पाम कोर्ट गैलरी, इंडिया हैबिटैट सेंटर, नई दिल्ली में उद्घाटित की गई।

भारत अध्ययन के व्यापक बौद्धिक पारिस्थितिकी तंत्र के एक भाग के रूप में परिकल्पित, जो आने वाले सप्ताहों में tuliresearchcentre.org पर लाइव हो रहा है, यह प्रदर्शनी उन चरणों पर प्रकाश डालती है, जिन्हें भारतीय लोकप्रिय कला और प्रिंटिंग प्रेस ने नेताजी के जीवन और समय पर दर्शाया है उनके शुरुआती चित्रों से लेकर 1939 में विष्णु दत्त नगर में निर्मित स्थल पर आईएनसी के पुनः अध्यक्ष चुने जाने पर उनके जुलूस लिथोग्राफ तक, सिंगापुर में आजाद हिंद फौज (आईएनए, 1942-43) की स्थापना तक, कोहिमा 1944 में युद्ध तक, उसके बाद उनकी शहादत, आईएनए भारत के स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी आंदोलनों और उनके बड़े समर्थक जापानी प्रधानमंत्री हिदेकी तोजो, गांधी जी और पंडित नेहरू के साथ उनके महत्वपूर्ण संबंधों, और उनकी विरासतों से संबंध, जो संस्थागत हो जाते हैं, जब हम कैलेंडर, फिल्मों, विज्ञापनों और राजनीतिक प्रचार के अन्य रूपों के माध्यम से 1947 के बाद भारतीय राजनीतिक पेंथियन की पुनः कल्पना करना शुरू करते हैं। प्रदर्शनी में प्राचीन राजनीतिक प्रचार लिथोग्राफ, कैलेंडर, पोस्टर, फिल्म लॉबी कार्ड, पोस्टकार्ड, फोटोग्राफ, और सांस्कृतिक कलाकृतियां शामिल हैं, जो दर्शकों को भारत के सबसे करिश्माई और प्रभावशाली नेताओं में से एक के दृश्य विकास का पता लगाने में सक्षम बनाती हैं।

तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज (टी.आर.आई.एस) एक अभूतपूर्व पहल है जिसका उद्देश्य समकालीन भारत की विशाल सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और कलात्मक विरासतों का अध्ययन करने के तरीके को नए सिरे से सोचने और परिभाषित करने का है। अग्रणी लेखक, अभिलेखाकार, क्यूरेटर, सांस्कृतिक एवं पशु कल्याण संस्था निर्माता एवं शिक्षक श्री नेविल तुली द्वारा स्थापित टीआरआईएस का उद्देश्य जनता को भारत की पुनः खोज के माध्यम से आत्म-खोज (सेल्फ-डिस्कवरी) की यात्रा पर आगे बढ़ने में सक्षम बनाना है।
